→ जोड़ एक महत्वपूर्ण संक्रिया है जिसका दैनिक जीवन में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है।
→ जोड़ विधि में संख्याओं में प्रत्येक संख्या की इकाई में इकाई, दहाई में दहाई, सैकड़ा में सैकड़ा जोड़ा जाता है।
→ जोड़ की संक्रियाएं बच्चों को रेखीय विधि, स्तंभ विधि, गिनतारा से जोड़ना, एकाधिक चिन्ह (•) बिंदु का प्रयोग कर जोड़ना आदि विधियों से सिखाया जाता है।
इसमें इस प्रकार से क्रमागत संख्याओं को जोड़ा जा सकता है -
तीन क्रमागत संख्याएँ जोड़ना
1 + 2 + 3 = 6
2 + 3 + 4 = 9
3 + 4 + 5 = 12
-- + -- + --
8 + 9 + 10 = 27
हम यहाँ देखते हैं कि योगफल 3 के गुणज हैं अर्थात प्रत्येक योगफल दूसरे से 3 अधिक है।
चार क्रमागत संख्याएँ जोड़ना
1 + 2 + 3 + 4 = 10
2 + 3 + 4 + 5 = 14
3 + 4 + 5 + 6 = 18
-- + -- + --
10 + 11 + 12 + 13 = 46
यहाँ हम देखते हैं कि योगफल में 4 की वृद्धि हुई अर्थात् प्रत्येक योगफल दूसरे से 4 अधिक है एवं प्रत्येक योगफल एक सम संख्या है।
यदि हम इसी करके देखें तो हम पायेंगे कि
(i) तीन क्रमागत संख्याओं क्रमशः योगफल ज्ञात करते हैं तो प्रत्येक योगफल 3 के गुणज होते हैं।
(ii) चार क्रमागत संख्याओं का योगफल क्रमशः करें तो प्रत्येक योगफल 4 अधिक हो जाता है एवं प्रत्येक योगफल एक सम संख्या होती है।
| 8 | 3 | 4 |
| 1 | 5 | 9 |
| 6 | 7 | 2 |
यह एक वर्ग है, इसमें सभी पंक्तियों का जोड़ 15 है। चाहे इसे आड़ा, तिरछा या खड़ा जोड़ा जाये योगफल 15 ही होगा। इसतरह के कई वर्ग हम क्रमागत संख्याओं के माध्यम से बना सकते हैं। इसका सूत्र है - HEB CIG FAD (हैब, सिग, फैड)
नौ खानों का एक वर्ग खींचकर उसमें A से I तक अक्षरों को चित्रानुसार लिखा जाये
| A | B | C |
| H | I | D |
| G | F | E |
अब सूत्रानुसार कोई 9 क्रमागत संख्याएँ लेकर उन्हें HEB CIG FAD के अनुसार रख दें। जैसे कि नौ क्रमागत संख्याएँ हैं 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19। इन्हें HEB CIG FAD वर्ग में दिये अनुसार रख दें।
| 18 | 13 | 14 |
| 11 | 15 | 19 |
| 16 | 17 | 12 |
अब योगफल देखें - 45 हम आड़ा, तिरछा किसी भी तरह जोड़ें योगफल 45 ही आवेगा।
जिन संख्याओं के अंत में (इकाई में) शून्य होता है उन्हें शून्यांत अर्थात जिसके अंत में शून्य हो कहते हैं। इनको हम मौखिक रूप से जोड़ सकते हैं।
इस विधि में बिंदु को किसी अंक के ऊपर लगाकर उसे एक अधिक किया जाता है अर्थात (•) का अर्थ अंक को एक अधिक करना है।
जोड़ने के प्रश्नों में (•) बिंदु एकाधिक चिन्ह का प्रयोग करने से सरलता होती है। जोड़ करते समय बीच में जोड़ अठारह से बड़ा नहीं आता। जोड़ करते समय जैसे ही जोड़ दो अंकों की संख्या प्राप्त होती है वैसे ही दहाई के एक को बायें अंक के ऊपर बिंदु एकाधिक चिन्ह लगाकर छोड़ देते हैं तथा इकाई का अंक लेकर आगे बढ़ते हैं। इकाई स्थान की तरह ही दहाई, सैकड़ा आदि स्थानों पर इसी प्रक्रिया से प्रश्न हल करते हैं।
उदाहरण
4 5 9
• •
1 8 7
———
6 4 6
टीप: इसमें हासिल को ऊपर लिखने की आवश्यकता नहीं है।
यदि अनेक संख्याओं का योग करना हो तो इस प्रकार घेरेंगे
• 0 6 9 7 • • 0 8 5 4 • • 5 8 3 ———— 2 1 3 4 ————
किसी संख्या के अंकों का जोड़ एक अंक प्राप्त होने तक हल करने को बीजांक कहते हैं।
जैसे संख्या→ 85,069 का बीजांक = 8 + 5 + 0 + 6 + 9 = 28 = 2 + 8 = 10 = 1 + 0 = 1
अर्थात् संख्या 85,069 का बीजांक 1 होगा।
बीजांकों का प्रयोग संख्याओं के योगफल में उत्तर की जाँच हेतु किया जाता है जो निम्नानुसार करते हैं-
संख्याओं के बीजांकों का योग = उत्तर का बीजांक
उदाहरण
346 → 4
+222 → 6
+123 → 6
—————
691 → 7
—————
यहाँ संख्याओं के योग का बीजांक संख्याओं के बीजांकों के योग के बराबर है अतः योगफल ठीक है।
जोड़ने की एकाधिक अंक प्रयोग विधि प्रचलित विधि का ही एक सरलीकृत रूप है। इसमें हासिल को बिंदु के रूप में रख देने पर बड़े-बड़े जोड़ सरलता से हो जाते हैं।
योग का आंकलन निकालने के लिए हम दस, सौ या हजार के निकटतम करके जोड़ते हैं जिससे हम बता सकते हैं कि लगभग योगफल होगा।
उदाहरण: एक गुल्लक में 73 सिक्के और दूसरे गुल्लक में 49 सिक्के हैं। इन दोनों गुल्लक के सिक्कों को मिलाकर सिक्कों की कुल संख्या का आंकलन कीजिए।
हल : 73 + 49 का आंकलन करने के लिए हम इन्हें दस के निकटतम कर जोड़ते हैं।
73 → 70
49 → 50
70 + 50 = 120
अतः दोनों गुल्लक के सिक्के मिलायेंगे तो लगभग 120 सिक्के प्राप्त होंगे। जबकि वास्तविक जोड़ करें तो 122 उत्तर होगा जो 120 से केवल 2 अधिक है। अर्थात् दोनों के बीच केवल 2 का अंतर है।
→ घटाना संक्रिया एक महत्वपूर्ण संक्रिया है जो दैनिक जीवन में सामान्य जोड़ की तरह ही सामान्य व्यवकलन किया की जाती है जिससे हमारा सामाजिक निर्वाह चलता रहता है।
इस संक्रिया में हम संख्याओं को स्तंभ विधि में ऊपर बड़ी व नीचे छोटी संख्या लिखते हैं पश्चात इकाई के अंकों का घटाव करते हैं यदि ऊपर वाला इकाई अंक नीचे वाले इकाई अंक से छोटा हो तो दहाई के अंक से पूरी एक दहाई उधार लाकर उस इकाई अंक को उसमें समूहित करके उसे ऊपर लिख देते हैं इसतरह उस समूहितकृत संख्या से नीचे के अंक को घटा देते हैं। यही क्रिया आगे दहाई, सैकड़ा के अंकों में करते हैं।
उदाहरण -
6 4 2
4 1 5
———
2 2 7
अभीष्ट उत्तर 227 होगा।
जिन दो अंकों का योग 10 होता है वे आपस में परममित्र अंक कहलाते हैं।
जैसे 9 का परममित्र 1 है, 8 का 2 है, 7 का 3 है, 6 का 4 है, एवं 5 का 5 है।
7 3 4 8 —— 2 5 ——
उपरोक्त प्रश्न में इकाई में से इकाई घटायेंगे, 3 में से 8 नहीं घटता तब 8 का परममित्र अंक 2 को ऊपर अंक 3 में जोड़कर नीचे लिख देंगे एवं 4 के बायें अंक पर एकाधिक चिन्ह (•) लगा देंगे। फिर दहाई में नीचे के अंक (4) अर्थात् 4 + 1 = 5 घटा देंगे।
(1) निकाल लेना
(2) कम करना
(3) तुलना
(4) जोड़ का विपरित या जोड़ का पूरक
निकाल लेना - उदाहरण: एक पुस्तक में 150 पृष्ठ है। ममता ने 80 पृष्ठ पढ़ लिये। कितने पृष्ठ पढ़ने के लिए शेष रह गये? 150 - 80 = 50
कम करना - उदाहरण: एक दुकानदार के पास 76 बोरी चीनी थी। दुकान बंद होने के समय 56 बोरी चीनी शेष बची। चीनी की कितनी बोरियां बिकीं? 76 - 56 = 20
तुलना - उदाहरण: 50 से 70 कितना अधिक है? 70 - 50 = 20
जोड़ का विपरित - उदाहरण: 70 में क्या जोड़ा जाये कि योगफल 100 हो जाये? 100 - 70 = 30
इस तरह के प्रश्नों को हल करने की चार चरण उपयोग में लाते हैं -
(1) प्रश्न को ठीक से पढ़ना
(2) व्यंजक को संख्याओं में लिखना
(3) व्यंजक को हल करना
(4) उत्तर निकालना
घटाने में उत्तर की जाँच - बीजांकों के प्रयोग द्वारा उत्तर की जाँच की जा सकती है।
[I] गणित में एकाधिक चिन्ह का प्रयोग जोड़ने की प्रक्रिया में किया जाता है, यह बिंदु लगाया जाता है -
(i) किसी अंक के ऊपर
(ii) किसी भी अंक के नीचे
(iii) इकाईयों का जोड़ करें तो दहाई अंक के ऊपर
(iv) इकाईयों का जोड़ करें तो दहाई अंक के नीचे
[II] घटाने की प्रक्रिया में परममित्र अंक का प्रयोग किया जाता है, परममित्र अंक को जोड़ा जाता है -
(i) स्तंभ विधि में ऊपर के अंक के साथ
(ii) स्तंभ विधि में बायें अंक के साथ
(iii) स्तंभ विधि में उसी अंक के साथ
(iv) उपरोक्त सभी असत्य हैं
[III] अंक '5' का परममित्र अंक होगा -
(i) 6
(ii) 8
(iii) 7
(iv) 10
[IV] कक्षा तीन की गणित पुस्तक में शिक्षण टीप दी गई है कि -
"पहाड़े बनवाना, याद करना व बीच-बीच में से पहाड़े (कटम) पूछना अभ्यास के लिए आवश्यक है अतः अन्य प्रश्न बनाकर दें।"
यह संकेत बताता है कि -
(i) विद्यार्थियों को पहाड़े कंठस्थ कराना लक्ष्य है
(ii) जोड़ने की प्रक्रिया न दोहराना पड़े यह लक्ष्य है
(iii) गुणा की संक्रिया अपूर्ण रह जायेगी
(iv) गुणा की अवधारणा स्पष्ट करना है
[V] प्राथमिक स्तर पर 3457 + 1887 जैसे जोड़ के प्रश्न हल कराये जाते हैं ताकि लक्ष्य प्राप्त किया जा सके -
(i) चार अंकों की संख्याओं के जोड़ की समझ आ सके
(ii) चार अंकों की संख्याओं का हासिल के साथ जोड़ की समझ आ सके
(iii) केवल हासिल की समझ आ सके
(iv) केवल जोड़ की समझ आ सके
[VI] प्राथमिक स्तर पर जोड़ संक्रिया सिखाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सहायक शिक्षण सामग्री होगी -
(i) श्यामपट एवं चाक
(ii) पाठ्यपुस्तक
(iii) गिनतारा
(iv) अभ्यास पुस्तिका
[VII] मौखिक प्रश्न हल कराने के पीछे मुख्य लक्ष्य है -
(i) बच्चे अपने दैनिक जीवन में ऐसी संक्रिया का हल कर सकें
(ii) बच्चे क्रियाओं के दोहराने पर शीघ्र प्रतिसंक्रिय हल बता सकें
(iii) समाज में बुद्धिमान कहलायें
(iv) सभी कथन सत्य हैं
[VIII] क्रमागत संख्याओं को जोड़ने से बनने वाले संख्या प्रतिरूप (पैटर्न) वाले प्रश्न विद्यार्थियों में दक्षता का विकास करते हैं -
(i) समय का विकास
(ii) कौशल एवं अनुप्रयोग का विकास
(iii) ज्ञान का विकास
(iv) उपरोक्त सभी
[IX] निकटतम संख्याओं के निकटतम निकलन ज्ञात कर जोड़ने या घटाने की संक्रिया की जाती है -
(i) विद्यार्थियों में आंकलन की समझ विकसित करना है
(ii) विद्यार्थियों में जोड़ की समझ विकसित करना है
(iii) विद्यार्थियों में जोड़ एवं घटाने की समझ विकसित करना है
(iv) समस्त संक्रियाओं की समझ विकसित करना है
[X] प्राथमिक कक्षाओं में निम्न तरह का प्रश्न बच्चों को दिया गया -
4 6 🔲 6
+ 2 1 3 3
🔲 3 2 4
———————————
9 🔲 9 3
———————————
इसे विद्यार्थी किस आधार पर हल करेगा -
(i) समझ
(ii) ज्ञान
(iii) कौशल अनुप्रयोग
(iv) उपरोक्त सभी
[XI] एक बच्चा प्रायमरी में पढ़ता है और वह शिक्षक द्वारा दिये गये जोड़ के प्रश्न को इस तरह हल करता है -
325 + 415 + 32 = 1060
इससे स्पष्ट है कि उसे समझ नहीं है -
(i) जोड़ की
(ii) हासिल की
(iii) इकाई में इकाई, दहाई में दहाई के जोड़ की
(iv) उपरोक्त सभी
[XII] शाब्दिक प्रश्नों को हल करते समय विद्यार्थियों से निम्नलिखित चरणों में से किस चरण का उपयोग किया जाना चाहिए -
(i) प्रश्न को ठीक से पढ़ना एवं समझना
(ii) व्यंजक को संख्याओं में लिखना
(iii) व्यंजक को हल करना एवं उत्तर निकालना
(iv) उपरोक्त सभी
[XIII] कक्षा-4 की गणित पुस्तक में एक प्रश्न दिया गया है -
'वह संख्या ज्ञात कीजिए जो 2273 से 231 बड़ी हो।'
यह प्रश्न बच्चे में किस दक्षता को परखने के लिए दी गई है -
(i) ज्ञान
(ii) समझ
(iii) ज्ञान व समझ दोनों
(iv) दोनों नहीं
[XIV] कक्षा-4 की गणित पुस्तक में एक प्रश्न दिया गया है -
"वह संख्या ज्ञात कीजिए जो 9331 से 4329 छोटी हो।"
विद्यार्थी इस प्रश्न को घटाने के किस पहलू के अन्तर्गत हल करेगा -
(i) निकाल लेना
(ii) कम करना
(iii) तुलना करना
(iv) जोड़ का विपरित
[XV] प्राथमिक स्तर पर जोड़ या घटाने के सवाल हल करने के पश्चात उत्तर की जाँच की जाती है - यह प्रक्रिया की जाती है क्योंकि -
(i) बच्चे को जोड़ना आता है या नहीं पता लग जाये
(ii) बच्चा अपने जोड़े या घटाये गये सवाल से सही उत्तर के लिए संतुष्ट हो जाये
(iii) शिक्षक ऐसा करने को कहते हैं
(iv) उपरोक्त में से कोई नहीं
[XVI] प्राथमिक स्तर पर बच्चे किन संख्याओं का योग व व्यवकलन मौखिक रूप से कर सकते हैं -
(i) एकाधिक चिन्ह द्वारा
(ii) शून्यांत संख्याओं
(iii) दोनों अंकों का
(iv) दोनों नहीं
[XVII] प्राथमिक स्तर के विद्यार्थी उत्तर की जाँच बीजांक के माध्यम से जोड़ के सवालों में निम्न तरह से कर सकते हैं -
(i) संख्याओं के बीजांकों के योग का योग = उत्तर का बीजांक
(ii) संख्याओं के बीजांकों का योग = उत्तर
(iii) संख्याओं के बीजांकों का योग = उत्तर का बीजांक
(iv) उपरोक्त में से कोई नहीं
[XVIII] प्राथमिक स्तर पर जोड़ करने की सर्वोत्तम विधि हो सकती है -
(i) अंगुलियों द्वारा
(ii) गिनतारे से जोड़
(iii) अंकों को लिखकर जोड़
(iv) (ii) एवं (iii) सही है
[XIX] नीचे दिया गया एक वर्ग जिसमें 9 खाने हैं। इसमें संख्याओं को इस क्रम में जमाये कि आड़ा, खड़ा, तिरछा योगफल अंकों का योग करें तो योगफल 27 आये। इसमें हमें क्रमागत संख्याओं का प्रयोग करना होगा -
(i) 1 से लेकर 9 तक
(ii) 3 से लेकर 11 तक
(iii) 5 से लेकर 13 तक
(iv) 7 से लेकर 15 तक
[XX] निम्न में से घटाने का महत्वपूर्ण पहलू नहीं है -
(i) कम करना
(ii) निकाल लेना
(iii) तुलना करना
(iv) डाल देना
[I] उत्तर (iii)
[II] उत्तर (i)
[III] उत्तर (i)
[IV] उत्तर (i)
[V] उत्तर (ii)
[VI] उत्तर (iii)
[VII] उत्तर (i)
[VIII] उत्तर (ii)
[IX] उत्तर (i)
[X] उत्तर (i)
[XI] उत्तर (iii)
[XII] उत्तर (iv)
[XIII] उत्तर (ii)
[XIV] उत्तर (iv)
[XV] उत्तर (ii)
[XVI] उत्तर (i)
[XVII] उत्तर (i)
[XVIII] उत्तर (iv)
[XIX] उत्तर (iii)
[XX] उत्तर (iv)
RF Tembhre
MP Seoni
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आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
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इन 👇 प्रकरणों के बारे में भी जानें।
1. गणित शिक्षण से चिंतन एवं तर्कशक्ति का विकास करना
2. गणित अध्यापन के प्रमुख उद्देश्य, चिंतन शक्ति का विकास
3. गणित शिक्षण से चिंतन एवं तर्क शक्ति का विकास
4. पाठ्यक्रम में गणित का स्थान- (गणित एवं इसका शिक्षा शास्त्र)
5. गणित की मानसिक, व्यवहारिक, साँस्कृतिक एवं व्यावसायिक उपयोगिता, गणित का सौन्दर्य तथा सत्य, गणित अध्यापन के उद्देश्य
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1. संविदा शाला वर्ग 3 का 2005 प्रश्न पत्र डाउनलोड करें
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