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शिक्षा के क्षेत्र में समस्त विषयों के अध्ययन एवं अध्यापन में जितनी तर्क शक्ति एवं चिन्तन करने की आवश्यकता गणित विषय में होती है उतनी अन्य विषयों में नहीं होती है। गणित ऐसा विषय है जिसमें अध्यापक द्वारा कुशलतापूर्वक पढ़ाया जाए तो छात्रों में चिंतन व तर्क करने की क्षमता का विकास होगा एवं छात्र अपनी चिंतन एवं तर्क क्षमता के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में विकास में गति पकड़कर ज्ञान के क्षेत्र में विकास करते हैं।
भाषा की तरह ही गणित में भी हम चिंतन का सामना करते हैं। बगैर चिंतन के गणित हल करना या गणित क्षेत्र में आगे बढ़ना बड़ा असंभव है। गणित विषय के प्रभावशाली शिक्षण के लिए उसके उद्देश्य का ज्ञान अति आवश्यक है। गणित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बालक का बौद्धिक, भावनात्मक एवं कौशलात्मक विकास करना है।
गणित विषय में विभिन्न विद्वानों ने अपना अलग-अलग मत दिया है - कोई गणित को गणनाओं का विज्ञान कहता है तो कोई संख्याओं एवं स्थान के विज्ञान के रूप में बताता है। कोई माप-तोल, मात्रा तथा आकार-प्रकार के विज्ञान के रूप में गणित को परिभाषित करता है।
हम देखें तो गणित का शाब्दिक अर्थ - "वह शास्त्र (विधा) जिसमें गणनाओं की प्रधानता हो।" है। दूसरे शब्दों में 'गणित अंक, अक्षर, चिन्ह आदि संक्षिप्त संकेतों का वह विज्ञान है जिसकी मदद से परिमाण (मात्रा), दिशा (आकार-प्रकार) एवं स्थान का बोध होता है।
1. लॉक के अनुसार - "गणित वह मार्ग है जिसके द्वारा बच्चों के मन अथवा मस्तिष्क में तर्क करने की आदत स्थापित होती है।"
2. बर्ट्रेण्ड रसेल के अनुसार - "गणित एक ऐसा विषय है जिसमें हम यह भी नहीं जानते कि हम किसके बारे में बात कर रहे हैं ? तथा न ही यह जान पाते हैं कि हम जो पढ़ रहे हैं वह सत्य भी है।"
3. ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार - "गणित मापन, मात्रा और विस्तार का विज्ञान है।"
4. गैलिलियो के अनुसार - "गणित एक भाषा है जिसमें ईश्वर ने ब्रह्मांड की रचना की है।"
5. मार्शल एच. स्टोन के अनुसार - "गणित गूढ़ तत्वों से भरे गूढ़ तंत्र का अध्ययन है। ये तत्व मूर्त रूप में वर्णित नहीं हैं।"
6. अल्बर्ट आइंस्टीन के अनुसार - "गणित के नियम जितना ज्यादा वास्तविकता से संबंध रखते हैं उतना ही निश्चित नहीं होते, जितना ज्यादा निश्चित होते हैं उतना ही वास्तविकता से संबंध नहीं रखते।"
7. बेंजामिन पियर्स के अनुसार - "गणित एक विज्ञान है जो आवश्यक निष्कर्षों को प्राप्त करती है।"
(i) गणित स्थान व संख्याओं का विज्ञान है।
(ii) यह गणनाओं का विज्ञान है।
(iii) यह माप-तोल, मात्रा तथा परिमाण व दिशा का विज्ञान है।
(iv) गणित विज्ञान की क्रमबद्ध एवं यथार्थ शाखा है।
(v) गणित ऐसा विज्ञान है जो आवश्यक निष्कर्षों को प्राप्त कर सकता है।
(vi) यह तार्किक आदतों को मस्तिष्क में व्यवस्थित करता है।
(vii) गणित अंतरिक्ष, मापन, विस्तार व मात्रा का विज्ञान है।
(viii) गणित एक अमूर्त (गूढ़), प्रयोगात्मक और आगमनात्मक विज्ञान है।
(1) वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना - किसी भी वस्तु का क्या, क्यों और कैसे का दृष्टिकोण वैज्ञानिक दृष्टिकोण कहलाता है। गणित में अक्सर उपरोक्त क्या, क्यों व कैसे के माध्यम से ही इसे हल किया जाता है। गणित का अध्यापन इस प्रकार करना चाहिए ताकि छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण व कौशल का विकास हो सके।
(2) व्यावहारिक उद्देश्य - मानव के दैनिक जीवन में लेन-देन, नापना, तौलना, गिनना, बेचना, लाभ-हानि आदि की गणना की जाती है। गणना के कौशल का विकास करना गणित के अध्यापन में किया जाना आवश्यक है जिससे छात्र अपने व्यावहारिक कार्य कुशलतापूर्वक निभा सकें।
(3) सांस्कृतिक उद्देश्य - बालकों को अपनी संस्कृति एवं सभ्यता को अच्छी तरह समझने के लिए एवं कलात्मक दृष्टिकोण देने के लिए गणित अध्यापन आवश्यक है।
(4) अनुशासनात्मक उद्देश्य - गणित के अध्ययन से छात्र में तर्क शक्ति का विकास एवं योजनाबद्ध व क्रमबद्ध रूप से कार्य करने के गुणों का विकास होता है तथा इन्ही गुणों के आधार पर अनुशासन उत्पन्न होता है। इसके साथ गणित में कुशाग्रता लगातार एकाग्रचित होकर अभ्यास कार्य करते रहने से बढ़ती है।
(5) अवकाश के समय का सदुपयोग - बालकों को रचनात्मक कार्यों के माध्यम से अपना समय व्यतीत करने में गणित बड़ी अग्रणी है। गणित के रोचक प्रयोग इस हेतु सहायक सिद्ध होते हैं।
(6) मानसिक शक्ति का विकास करना - गणित अध्ययन व अध्यापन से मानसिक शक्तियों का विकास होता है। इससे विद्यार्थियों में तर्क, चिंतन, निरीक्षण, विश्लेषण व सही निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।
(7) चारित्रिक मूल्यों का विकास - गणित के अध्यापन से बालक सत्य-असत्य में अंतर करना सीखता है, गणित के द्वारा बालक शुद्धता व नियमितता सीखता है। इस तरह गणित का पाठ्यक्रम विभिन्न गुणों का विकास करते हुए अपने चारित्रिक मूल्यों में श्रेष्ठता प्राप्त कर लेता है।
(8) सामाजिक एवं भौतिक समृद्धि का विकास - गणित विषय का ज्ञान उन्नति एवं विकास की आधारशिला है। भौतिक, रसायन, भूगर्भ विज्ञान, इंजीनियरिंग, खगोलशास्त्र एवं जीवविज्ञान आदि गणित की सहायता के बिना समझ में नहीं आते। इस तरह व्यक्ति की सामाजिक उन्नति की भौतिक समृद्धि से जुड़ी हुई है।
(9) मनोभावों एवं विचारों को प्रकट करने का सशक्त माध्यम - छोटे बच्चों की गणितीय शिक्षा घर पर ही प्रारंभ हो जाती है। बच्चे कम, ज्यादा, बहुत, गिनती करना आदि बातें प्रारंभ से ही करता है इससे उनमें दृढ़ता आ जाती है एवं विद्यालय स्तर पर बालक अपने मनोभावों व विचारों को स्पष्ट रूप से प्रकट कर सकता है।
गणित ही एक ऐसा क्षेत्र है जिससे बालक में चिंतन शक्ति का विकास होता है। हमारे दैनिक जीवन में छोटा-बड़ा, कम-ज्यादा, लाभ-हानि, हल्का-भारी जाने कितने ऐसे व्यावहारिक क्षेत्र है जिसमें व्यक्ति को चिंतन करने (सोचने) की जरूरत पड़ती है। यदि एक बालक इस तरह की बातों या क्षेत्रों में अपना ध्यान ज्यादा लगाता है तो यह निश्चित है कि उसमें चिंतन शक्ति का विकास होगा।
बड़े-बड़े वैज्ञानिकों, दार्शनिकों एवं खगोल शास्त्रियों ने विभिन्न शोध, तर्क, एवं ब्रह्मांड के संदर्भ में बहुत सी बातें निश्चित की हैं, उन्हें ये सब निश्चित करने में गणितीय ज्ञान ने ही उनका साथ दिया है। एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र की दूरी, पृथ्वी की सूर्य से दूरी आदि बातें गणितीय ज्ञान से प्राप्त की गई हैं।
गणित अध्ययन में जब एक बालक किसी दिए गए प्रश्न को हल करता है तब उसे आगे कीयाविधि बढ़ाने के लिए चिंतन की आवश्यकता पड़ती है। बालक प्रश्न को बिना सोचे समझे हल नहीं कर पाता - शिक्षक उसे विभिन्न बातें (नियम) समझाता है, बालक किसी भी प्रश्न को हल करने हेतु चिंतन करके उसको हल कर लेता है साथ ही उसी तरह के अन्य प्रश्नों को भी हल करता है। प्राथमिक स्तर पर यदि बच्चों को शिक्षक द्वारा कुशलता पूर्वक एवं बोधगम्य शैली में अध्यापन कार्य कराया गया है तो निश्चित ही बच्चों में गणितीय ज्ञान प्रखर होकर उनमें चिंतन शक्ति का विकास होता है और वे आगे चलकर उच्च कक्षाओं में गणित विषय लेकर अध्ययन करते हैं, गणित उनके लिए एक रुचि का विषय हो जाता है।
1. विविध गतिविधियों का उपयोग - बच्चों के पास शाला आने से पूर्व गणित संबंधित अनुभव होते हैं - वे घर में चीजों को जमाते हैं, आस-पास के रास्तों पर चलते हैं, खाने की मात्रा देखते हैं, पानी भरते हैं, सफाई करते हैं - इस तरह की दैनिक क्रियाओं में न जाने कितना गणितीय अनुभव उनमें छिपा होता है। फिर भी हम पाते हैं कि गणित सीखना बड़ा मुश्किल हो रहता है। इस स्थिति से निबटने के लिए उपयुक्त गतिविधियों का उपयोग जरूरी है क्योंकि गतिविधियों को करने में बच्चे अपना दिमाग लगाते हैं जिससे उनमें चिंतन शक्ति का विकास होता है।
2. स्थूल से सूक्ष्म की ओर चलना - गणित में बालकों के अंदर चिंतन विकास के लिए यह बात आवश्यक है कि हम स्थूल (कोई ठोस आकृति) से सूक्ष्म (अर्थात उस आकृति का चित्र या उसका प्रतीक) की ओर चलना चाहिए ताकि बालक में चिंतन शक्ति का विकास क्रमबद्ध बढ़ता चले। ठोस वस्तुएं बच्चों की समझ एवं चिंतन को पुख्ता करने हेतु सशक्त माध्यम हैं।
3. उदाहरणों से संपर्क के बाद अवधारणा विकसित करना - गणित से चिंतन के विकास हेतु एक पहलू जो गणित सिखाने पर असर डालता है वह किसी अवधारणा का विकास कैसे होता है। यदि हम किसी बालक को एक केले का पेड़ व एक आम का पेड़ दोनों अलग-अलग दिखाते हैं बालक दोनों को पेड़ का ही दर्जा देता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन दोनों के कुछ समान गुण हैं जबकि देखने में दोनों में बड़ा अन्तर है। 'पेड़' की अवधारणा हासिल करने के लिए जरूरी है कि हम एक ही पेड़ पर निर्भर न हों - कई तरह के पेड़ों के संपर्क में बालक को लायें एवं पेड़ों के समान गुणों के बारे में बच्चों को बतायें।
4. अनुमान लगाना व सत्यापन करना - चिंतन के विकास हेतु किसी क्रियाकलाप में अनुमान लगाने हेतु एवं फिर उसका सत्यापन करने हेतु बालकों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर शिक्षक अपनी मुट्ठी में कुछ बीज रख ले व बच्चों से कहे कि लगभग उसके हाथ में कितने बीज होंगे। बच्चे सोचेंगे और अनुमानतः बताएँगे। फिर वास्तविक रूप से बीजों को गिनकर इसका सत्यापन करें।
5. गणित की क्रियाओं में अभिव्यक्ति के अवसर - बालकों को गणित की क्रियाविधि में यदि शिक्षक बालकों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करे कि उन्होंने गणित की इस क्रिया में क्या किया ?, किस क्रम में किया और कैसे क्यों किया तो निश्चित ही उनमें चिंतन शक्ति का विकास अवश्य होगा।
6. गणितीय क्रियाकलापों में बालकों की सहभागिता - बालकों में चिंतन शक्ति का विकास तभी संभव है जब प्रत्येक बालक गणितीय क्रियाकलापों में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करता है। शिक्षक को चाहिए कि वे सभी की सहभागिता सुनिश्चित करें।
चिंतन व तर्क शक्ति में अंतर है। चिंतन किसी क्षेत्र में कार्य करने के लिए सोचना होता है जबकि तर्क शक्ति किसी कार्य क्षेत्र में भिन्न तथ्यों का विश्लेषण करना एवं विचार करना होता है कि उसमें ऐसा है तो क्यों है एवं ऐसा नहीं है तो क्यों नहीं है?
तार्किक चिंतन वह प्रक्रिया होती है जिसमें निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए एक व्यक्ति को समुचित ढंग से अपनी तार्किक शक्ति का प्रयोग करना पड़ता है। विभिन्न तरह की संरचनाओं एवं तथ्यों में तार्किक रूप से अपने विश्लेषण की श्रृंखला को विकसित कर समस्या एवं परिस्थितियों को हल किया जाता है।
डॉ. कार्ल अल्बर्ट का मानना है कि श्रृंखलाबद्ध सोच सभी तार्किक चिंतन का आधार है। व्यक्ति का चरणों में सोचना ही तार्किक रूप से सोचना होता है। यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि तार्किक रूप से सोचने की प्रक्रिया इंसान को हाजिर जवाब एवं होशियार बना देती है। यदि किसी बच्चे में तार्किक सोच है तो वह नकारने की प्रवृत्ति का परित्याग कर देता है अतः वह हर सवाल का जवाब देने की समझ रखता है।
गणित की सबसे महत्वपूर्ण एवं मूल दक्षता तार्किक सोच है जिसका विकास एक शिक्षक विभिन्न तरीकों को अपनाकर कर सकता है - जैसे ऐसे प्रश्न पूछना जिसमें बालकों को तर्क-वितर्क करने की आवश्यकता पड़े। उनकी सोच व समझ को विकसित करने हेतु विविध तरह के पैटर्न, पजल (माथापच्ची) की गतिविधियाँ करवाये ताकि बच्चे में तार्किक चिंतन का विकास हो सके।
गणित में प्राथमिक स्तर के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए विषयवस्तु को छः अधिगम क्षेत्रों में विभाजित किया गया है - (1) संख्या पद्धति, (2) मापन (लम्बाई, वजन, धारिता), (3) परिमाप व क्षेत्रफल, ऐकिक नियम, भिन्न, प्रतिशत, लाभ-हानि, साधारण ब्याज, (4) ज्यामितीय आकृतियाँ, (5) समय एवं (6) मुद्रा।
अतः बच्चों में तार्किक चिंतन लाने के लिए शिक्षक को निम्न उपाय करने चाहिए -
1. विविध प्रकार की गतिविधियों का समावेश करें जिसमें बच्चों को सोच-विचार करने की जरूरत पड़ती हो।
2. कौशलात्मक एवं अनुप्रयोग से संबंधित प्रश्नों को बनाकर बालकों के सामने रखा जाये व उनसे पूछा जाये ताकि बच्चे अपनी समझ के द्वारा उनका उत्तर दे सकें।
3. चित्रों, पहेलियों, माथापच्ची आदि के माध्यम से बच्चों की तर्क शक्ति का उचित विकास किया जा सकता है।
4. मिलकर समस्या का समाधान ढूँढने हेतु बच्चों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
5. शाब्दिक प्रश्नों को बच्चों के सामने रखें व उन्हें सोच-समझकर जवाब ढूँढने को कहा जाये।
6. तार्किक चिंतन हेतु वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्नों का प्रयोग बच्चों में सबसे उपयुक्त या उचित कौन सा है की समझ विकसित करने में विशेष रूप से सहायक होते हैं।
7. तर्क शक्ति के विकास हेतु शिक्षक में प्रतिभा होनी चाहिए।
8. विभिन्न नई स्थितियों को उत्पन्न कर उन्हें नई दिशा में चिंतन एवं तर्क हेतु प्रोत्साहित करना शिक्षक का ध्येय होना चाहिए।
9. शिक्षक नवीन समस्याओं को छात्रों के समक्ष उत्पन्न करे ताकि अपनी तार्किक शक्ति के माध्यम से बालक समस्या का समाधान ढूँढ सकें।
10. बालकों में तर्क शक्ति के विकास हेतु नवीन खोजों हेतु प्रोत्साहन देना चाहिए।
11. शाला में बच्चों के लिए वाद-विवाद, लेख या संरचना क्रियाकलापों का आयोजन किया जाना चाहिए।
1. जिज्ञासा व उत्सुकता
2. कठिन समस्याओं को हल करने में सूझबूझ का प्रयोग करने की क्षमता
3. बालक की बुद्धिलब्धि एवं उसकी प्रवीण्यता
4. बालक की कल्पनाशक्ति व चिंतन शक्ति की अधिकता
5. बालक का गंभीर, चिंतनशील होना
6. मानसिक व शारीरिक रूप से सक्रिय होना
7. एक ही वस्तु को विभिन्न रूपों में देखने की क्षमता
8. बहुत से विचारों को एक ही समय में केन्द्रित करने की योग्यता
9. तार्किक चिंतन हेतु बालकों में सृजनात्मकता का होना अति आवश्यक है
1. ज्ञानात्मक उद्देश्य - छात्र गणित संबंधी पद, अवधारणाएँ, संकेत, परिभाषाएँ, सिद्धांतों, सूत्रों आदि का ज्ञान प्राप्त कर सकें।
2. सही समझ एवं बोध संबंधी उद्देश्य - छात्र गणित संबंधी पद, अवधारणाएँ, संकेत, परिभाषाएँ, सिद्धांतों आदि में वर्णित बातों की सही समझ विकसित कर सकें। अर्थात् इनका ज्ञान अर्जित कर लेने पर वे उपयुक्त उदाहरण दे सकें, तुलना कर सकें, वर्गीकरण, गणना, व्याख्या आदि कर सकें।
3. अनुप्रयोग उद्देश्य - छात्र गणित का ज्ञान एवं सही समझ अर्जित करके उसका उपयोग नवीन परिस्थितियों में कर सकें।
4. कौशल संबंधी उद्देश्य
5. गणित विषय की सराहना करने संबंधी उद्देश्य
6. गणित के प्रति रुचि उत्पन्न करने संबंधी उद्देश्य
गणित शिक्षण में आधुनिक तकनीकि एवं नवाचारों का प्रयोग एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है। वर्तमान परिदृश्य में गणित को केवल ब्लैकबोर्ड और चाक तक सीमित न रखकर इसे गतिविधि-आधारित (Activity-based learning), खेल-आधारित (Gamification) और व्यावहारिक जीवन से जोड़कर पढ़ाया जाना चाहिए। आधुनिक प्राथमिक शिक्षा में 'एकीकृत शिक्षण' (Integrated Learning) और 'गणितीय प्रयोगशाला' (Mathematics Laboratory) की अवधारणा को शामिल किया गया है, जिससे छात्रों में अमूर्त गणितीय संकल्पनाओं को मूर्त रूप में समझने की क्षमता का विकास होता है। इसके साथ ही, निदानात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) के माध्यम से कमजोर छात्रों की कमियों को पहचानकर उन्हें सुधारने के विशेष प्रयास किए जाते हैं।
प्रश्न 1. जिस बालक में तर्कशक्ति व चिंतन करने की क्षमता है वे अक्सर होते हैं
(A) हाजिर जवाब
(B) बातूनी
(C) मनमौजी
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 2. गणित विषय का अध्ययन हेतु आवश्यक तत्व है
(A) तर्क शक्ति का कौशल
(B) चिंतन व समझ
(C) अनुप्रयोग की क्षमता
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 3. गणित विषय का अर्थ है
(A) वह शास्त्र जिसमें गणनाओं की प्रधानता हो
(B) वह शास्त्र जिसमें अनुमान लगाने की प्रधानता हो
(C) वह शास्त्र जो तर्क विज्ञान की प्रधानता हो
(D) वह शास्त्र जो वृद्धि व विकास पर बल देता हो
प्रश्न 4. "गणित वह मार्ग है जिसके द्वारा बच्चों के मन अथवा मस्तिष्क में तर्क करने की आदत स्थापित होती है।" यह मत है
(A) गैलिलियो का
(B) अल्बर्ट आइंस्टीन का
(C) बेंजामिन पियर्स का
(D) लॉक का
प्रश्न 5. निम्न में से गणित विषय के संदर्भ में असत्य तर्क है
(A) गणित विज्ञान की क्रमबद्ध एवं यथार्थ शाखा है
(B) यह तार्किक आदतों को मष्तिष्क में स्थापित करता है
(C) यह केवल मूर्त विचारों का संग्रह है
(D) यह स्थान एवं संख्याओं का विज्ञान है
प्रश्न 6. गणित अध्यापन से बालकों के अन्दर वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है क्योंकि
(A) तर्कों एवं चिंतन के द्वारा समस्याओं पर विचार करते हैं
(B) इसमें सूत्रों एवं विभिन्न सिद्धांतों को पढ़ाया जाता है
(C) गणित विषय का अध्ययन नियमों पर आधारित है
(D) उपरोक्त सभी कथन सत्य हैं
प्रश्न 7. गणित अध्यापन का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए
(A) बालक व्यावहारिक बने
(B) बालक स्व अनुशासन में बंध जाये
(C) मानसिक शक्तियों का उनमें विकास हो
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 8. बालकों में गणित अध्ययन से चारित्रिक विकास होता है क्योंकि
(A) गणित में सत्य-असत्य में अंतर करना सीखता है
(B) चरित्र सुधार हेतु कुछ सूत्रों को सीखता है
(C) बालक में तार्किक सोच विकसित होती है
(D) बालक वाकपटु हो जाता है
प्रश्न 9. एक बालक में चिंतन व तर्क शक्ति का विकास शिक्षक द्वारा किया जा सकता है यदि शिक्षक
(A) उच्च तकनीकी का अध्यापन में प्रयोग करता है
(B) छात्रों को कड़े अनुशासन में रखकर अध्यापन कराए
(C) समस्याओं पर अनुमान लगाने को कहे एवं सत्यापन करे
(D) अधिकाधिक गृहकार्य दे और प्रतिदिन चेक करे
प्रश्न 10. बच्चों को गणित विषय में अभिव्यक्ति का अवसर दिया जाना चाहिए क्योंकि
(A) तर्क करने की क्षमता का विकास होता है
(B) बच्चों में वाकपटुता बढ़ती है
(C) बच्चों में बोल-वार्तालाप में सुधार होता है
(D) बच्चे में ज्ञान की वृद्धि होती है
प्रश्न 11. बालकों में नकारने की प्रवृत्ति कम होगी यदि शिक्षक अपने बालकों में विकास करे
(A) अनुशासन का
(B) नियम एवं संयम का
(C) तर्क व चिंतन का
(D) उपरोक्त सभी का
प्रश्न 12. बच्चों में तार्किक चिंतन का आधार है
(A) श्रृंखलाबद्ध सोच
(B) संख्या व संक्रियाओं का ज्ञान
(C) अनुशासन व खेल
(D) उपरोक्त में कोई नहीं
प्रश्न 13. प्राथमिक स्तर गणित विषय के पाठ्यक्रम में अधिगम क्षेत्रों की संख्या है
(A) चार
(B) पाँच
(C) छः
(D) सात
प्रश्न 14. गणित विषय में पहेलियाँ, माथापच्ची देने के पीछे उद्देश्य होता है
(A) छात्रों का मनोरंजन करना
(B) समय का सदुपयोग करना
(C) चिंतन व तर्क का विकास करना
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 15. बालकों की तर्क शक्ति का विकास करने हेतु आवश्यक है कि
(A) शिक्षक प्रतिभाशाली हो
(B) बच्चों में सृजनात्मकता का विकास करें
(C) शाब्दिक व वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को हल करायें
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 16. यदि एक बालक शाला में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु घबराता है इसका मुख्य कारण हो सकता है
(A) बालक बहुत शर्मीला है
(B) बालक में तर्क-वितर्क करने की क्षमता नहीं है
(C) बालक के पास शब्द भंडार कम है
(D) बालक अन्य ज्ञानी है
प्रश्न 17. तार्किक सोच रखने वाला विद्यार्थी माना जा सकता है जो
(A) बहुत अधिक बातें करता है
(B) जो अक्सर किताबों में डूबा रहता है
(C) जो जिज्ञासावश बहुत सारी बातें शिक्षक से पूछता है
(D) जो सदैव प्रसन्नचित्त व शांत रहता है
प्रश्न 18. तार्किक सोच व चिंतन हेतु एक विद्यार्थी में आवश्यक गुण होना चाहिए
(A) मानसिक व शारीरिक रूप से सक्रियता
(B) बालक जिज्ञासु हो
(C) समस्याओं को निबटाने में अग्रसर
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 19. गणित अध्यापन का ज्ञानात्मक उद्देश्य निम्न में से निहित है
(A) परिभाषाओं, सूत्रों, सिद्धांतों आदि का ज्ञान प्राप्त करना
(B) विभिन्न कौशलों का विकास करना
(C) गणित विषय में रुचि उत्पन्न करना
(D) उपरोक्त सभी कथन सही हैं
प्रश्न 20. प्राथमिक स्तर पर संख्याओं का ज्ञान कराते समय निम्न में से किस प्रकार के प्रश्न बच्चों में तार्किक सोच व आंकड़ों में संबंध स्थापित करने की समझ उत्पन्न करने में सहायक हो सकते हैं?
(A) जोड़ना व घटाना के सवाल
(B) पहाड़ा याद करना
(C) पैटर्न बनाना
(D) छोटी व बड़ी संख्याएँ
प्रश्न 21. ज्यामितीय संरचनाओं में बालक सबसे ज्यादा तार्किक चिंतन का प्रयोग कर सकते हैं, यदि
(A) चित्र बनाने में दक्ष है
(B) विभिन्न आकार-प्रकार के चित्रों का ज्ञान है
(C) सृजनात्मकता में सहभागिता का ध्यान रखते हैं
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 22. ये बालक अपने व्यावहारिक जीवन में सबसे ज्यादा सफल होंगे जिनमें तार्किक चिंतन सबसे अधिक होगा क्योंकि
(A) समाज में ज्ञानी लोगों की ज्यादा प्रतिष्ठा होती है
(B) दैनिक जीवन में लेन-देन या व्यापार करना होता है
(C) तार्किक सोच वाले लोगों को अधिक काम करने की जरूरत नहीं होती
(D) उपर्युक्त में सभी कथन असत्य हैं
प्रश्न 23. गणित शिक्षण का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उद्देश्य क्या है?
(A) बच्चों को केवल गणना सिखाना
(B) बच्चों की तार्किक और चिंतन शक्ति का विकास करना
(C) परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कराना
(D) गणितीय सूत्रों को कंठस्थ कराना
प्रश्न 24. 'गणित एक ऐसा विषय है जिसमें हम यह भी नहीं जानते कि हम किसके बारे में बात कर रहे हैं' यह कथन किसका है?
(A) लॉक
(B) बट्रेण्ड रसेल
(C) गैलिलियो
(D) आइंस्टीन
प्रश्न 25. गणित की प्रकृति कैसी होती है?
(A) तार्किक और यथार्थ
(B) अस्पष्ट
(C) केवल सैद्धांतिक
(D) प्रायोगिक नहीं
प्रश्न 26. प्राथमिक स्तर पर गणित शिक्षण का व्यावहारिक उद्देश्य क्या है?
(A) उच्च गणित की तैयारी करना
(B) दैनिक जीवन के लेन-देन व गणनाओं को कुशल बनाना
(C) वैज्ञानिक बनना
(D) अमूर्त चिंतन बढ़ाना
प्रश्न 27. 'स्थूल से सूक्ष्म की ओर' शिक्षण सूत्र का पालन करने से बालकों में क्या विकसित होता है?
(A) रटने की प्रवृत्ति
(B) चिंतन व तर्क शक्ति
(C) शारीरिक श्रम
(D) संकोच की भावना
प्रश्न 28. गणितीय अवधारणाओं के विकास के लिए प्रारंभिक चरण में क्या आवश्यक है?
(A) केवल मौखिक निर्देश
(B) ठोस वस्तुओं और गतिविधियों का प्रयोग
(C) कठिन समीकरण
(D) बिना समझे अभ्यास
प्रश्न 29. गणित में अनुमान लगाने और उसका सत्यापन करने से बालकों में क्या लाभ होता है?
(A) समय की बर्बादी होती है
(B) उनकी चिंतन शक्ति और सटीकता बढ़ती है
(C) वे भ्रमित होते हैं
(D) कोई प्रभाव नहीं पड़ता
प्रश्न 30. गणित की भाषा से क्या तात्पर्य है?
(A) केवल अंग्रेजी भाषा
(B) अंक, अक्षर, चिन्ह और संक्षिप्त संकेत
(C) कठिन शब्दावली
(D) क्षेत्रीय बोलियाँ
प्रश्न 31. गणित शिक्षण में निदानात्मक परीक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(A) छात्रों को दंडित करना
(B) छात्रों की अधिगम संबंधी कठिनाइयों और कमियों का पता लगाना
(C) केवल ग्रेड देना
(D) पाठ्यक्रम पूरा करना
प्रश्न 32. गणितीय प्रयोगशाला (Mathematics Lab) किस उद्देश्य में सहायक है?
(A) खेलकूद के लिए
(B) अमूर्त अवधारणाओं को मूर्त रूप में समझने व प्रयोग करने के लिए
(C) केवल सजावट के लिए
(D) समय बिताने के लिए
प्रश्न 33. मानसिक शक्तियों के विकास में गणित की क्या भूमिका है?
(A) यह मानसिक शक्तियों को कुंद करता है
(B) यह तर्क, निरीक्षण, विश्लेषण व निर्णय क्षमता को बढ़ाता है
(C) इसका मानसिक विकास से कोई लेना-देना नहीं है
(D) यह केवल याददाश्त कमजोर करता है
प्रश्न 34. गणितीय चिंतन के विकास के लिए शिक्षक को कक्षा में किस प्रकार का वातावरण बनाना चाहिए?
(A) भयमुक्त और सहभागितापूर्ण
(B) पूर्णतः अनुशासित और मौन
(C) केवल शिक्षक केंद्रित
(D) उपेक्षापूर्ण
प्रश्न 35. बच्चों में गणित के प्रति रुचि उत्पन्न करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
(A) बार-बार डांटना
(B) खेलकूद, पहेलियों और दैनिक जीवन की गतिविधियों का उपयोग करना
(C) लंबी किताबें पढ़ना
(D) रट्टा मारना
प्रश्न 36. गणित विषय का अन्य विज्ञानों (जैसे भौतिकी, रसायन) के साथ कैसा संबंध है?
(A) कोई संबंध नहीं है
(B) गणित उनके अध्ययन की आधारशिला है
(C) वे एक-दूसरे के विरोधी हैं
(D) गणित उनके बाद विकसित हुआ
प्रश्न 37. तार्किक चिंतन की प्रक्रिया में व्यक्ति मुख्य रूप से क्या करता है?
(A) केवल कल्पना करता है
(B) तथ्यों का विश्लेषण कर निष्कर्ष पर पहुँचता है
(C) अनुमान लगाता है और छोड़ देता है
(D) बिना सोचे उत्तर देता है
प्रश्न 38. गणितीय पाठ्यक्रम निर्माण में किस सिद्धांत का ध्यान रखना चाहिए?
(A) बाल केंद्रितता और मनोवैज्ञानिक स्तर
(B) केवल शिक्षकों की सुविधा
(C) अत्यधिक कठिनता
(D) केवल सैद्धांतिक पक्ष
प्रश्न 39. आगमन विधि (Inductive Method) गणित शिक्षण में क्यों उपयोगी है?
(A) यह उदाहरणों से नियमों की ओर ले जाती है जिससे चिंतन बढ़ता है
(B) यह रटने पर जोर देती है
(C) यह बहुत लंबी विधि है
(D) इसमें छात्र निष्क्रिय रहते हैं
प्रश्न 40. गणित में त्रुटियों (Errors) का क्या महत्व है?
(A) त्रुटियाँ अधिगम प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा हैं जो चिंतन को दिशा देती हैं
(B) त्रुटियाँ करने वाले छात्र अयोग्य होते हैं
(C) त्रुटियों को नजरअंदाज कर देना चाहिए
(D) त्रुटियाँ दंड का कारण हैं
प्रश्न 41. गणितीय अवधारणाओं की अमूर्तता को दूर करने का सबसे प्रभावी साधन क्या है?
(A) कठिन परिभाषाएँ
(B) ठोस वस्तुएं और दृश्य-श्रव्य सामग्री
(C) लंबी पुस्तकें
(D) मौखिक उपदेश
प्रश्न 42. प्राथमिक स्तर पर बच्चों को संख्या ज्ञान कराते समय किस कौशल का विकास पहले होना चाहिए?
(A) जटिल भाग
(B) वर्गीकरण, मिलान और गिनना
(C) बीजगणित
(D) त्रिकोणमिति
प्रश्न 43. गणित शिक्षण में 'पुनः शिक्षण' (Remedial Teaching) कब आवश्यक होता है?
(A) जब पाठ्यक्रम समय से पहले खत्म हो जाए
(B) जब निदानात्मक परीक्षण के बाद छात्रों की कमजोरियाँ दूर करनी हों
(C) जब शिक्षक का मन हो
(D) परीक्षा के तुरंत बाद
प्रश्न 44. गणितीय भाषा की विशेषता क्या है?
(A) यह सार्वभौमिक और अत्यधिक स्पष्ट होती है
(B) यह अस्पष्ट होती है
(C) यह स्थान के साथ बदलती है
(D) यह कठिन होती है
प्रश्न 45. एक प्रभावी गणित शिक्षक वह है जो
(A) स्वयं सारे सवाल हल कर दे
(B) छात्रों को स्वयं चिंतन करने और खोजने के लिए प्रेरित करे
(C) केवल पाठ्यपुस्तक पढ़ाए
(D) गृहकार्य न दे
प्रश्न 46. गणितीय पहेलियाँ और पैटर्न हल करने से छात्रों में किस गुण का विकास होता है?
(A) केवल मनोरंजन
(B) समस्या समाधान और तार्किक सृजनात्मकता
(C) आलस्य
(D) घबराहट
प्रश्न 47. गणित में 'सामान्यीकरण' (Generalization) का क्या अर्थ है?
(A) विशिष्ट उदाहरणों से नियम या सिद्धांत का निष्कर्ष निकालना
(B) चीजों को सामान्य समझना
(C) नियम को रटना
(D) गणना छोड़ना
प्रश्न 48. बच्चों में गणितीय भय (Math Anxiety) को दूर करने के लिए शिक्षक को क्या करना चाहिए?
(A) भय का माहौल बनाना
(B) तनावमुक्त, सहयोगात्मक और आनंददायक वातावरण देना
(C) सजा देना
(D) गणित पढ़ाना बंद कर देना
प्रश्न 49. गणित अध्ययन से छात्रों में किस चारित्रिक मूल्य का विकास होता है?
(A) अनियमितता
(B) सत्यनिष्ठा, नियमितता और शुद्धता
(C) लापरवाही
(D) उदासीनता
प्रश्न 50. गणित विषय को विज्ञानों का 'शिखर' या 'रानी' क्यों कहा जाता है?
(A) क्योंकि यह सबसे कठिन है
(B) क्योंकि सभी विज्ञान गणितीय तर्कों और माप पर आधारित हैं
(C) क्योंकि यह सबसे पुरानी भाषा है
(D) क्योंकि इसमें कम पढ़ना पड़ता है
प्रश्न 1. उत्तर (A)
प्रश्न 2. उत्तर (D)
प्रश्न 3. उत्तर (A)
प्रश्न 4. उत्तर (D)
प्रश्न 5. उत्तर (C)
प्रश्न 6. उत्तर (D)
प्रश्न 7. उत्तर (D)
प्रश्न 8. उत्तर (A)
प्रश्न 9. उत्तर (C)
प्रश्न 10. उत्तर (A)
प्रश्न 11. उत्तर (C)
प्रश्न 12. उत्तर (A)
प्रश्न 13. उत्तर (C)
प्रश्न 14. उत्तर (C)
प्रश्न 15. उत्तर (D)
प्रश्न 16. उत्तर (B)
प्रश्न 17. उत्तर (C)
प्रश्न 18. उत्तर (D)
प्रश्न 19. उत्तर (A)
प्रश्न 20. उत्तर (C)
प्रश्न 21. उत्तर (D)
प्रश्न 22. उत्तर (B)
प्रश्न 23. उत्तर (B)
प्रश्न 24. उत्तर (B)
प्रश्न 25. उत्तर (A)
प्रश्न 26. उत्तर (B)
प्रश्न 27. उत्तर (B)
प्रश्न 28. उत्तर (B)
प्रश्न 29. उत्तर (B)
प्रश्न 30. उत्तर (B)
प्रश्न 31. उत्तर (B)
प्रश्न 32. उत्तर (B)
प्रश्न 33. उत्तर (B)
प्रश्न 34. उत्तर (A)
प्रश्न 35. उत्तर (B)
प्रश्न 36. उत्तर (B)
प्रश्न 37. उत्तर (B)
प्रश्न 38. उत्तर (A)
प्रश्न 39. उत्तर (A)
प्रश्न 40. उत्तर (A)
प्रश्न 41. उत्तर (B)
प्रश्न 42. उत्तर (B)
प्रश्न 43. उत्तर (B)
प्रश्न 44. उत्तर (A)
प्रश्न 45. उत्तर (B)
प्रश्न 46. उत्तर (B)
प्रश्न 47. उत्तर (A)
प्रश्न 48. उत्तर (B)
प्रश्न 49. उत्तर (B)
प्रश्न 50. उत्तर (B)
आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
EduFavour.Com
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