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बालक कैसे सोचते हैं, और कैसे सीखते हैं? इस जानकारी के लिए हमें बालक के बौद्धिक विकास की अवस्थाओं को समझना होगा।
(1) संवेदी प्रेरक अवस्था : (जन्म से लेकर 2 वर्ष) - बौद्धिक विकास के सन्दर्भ में जन्म से लेकर दो वर्ष की आयु तक को संवेदी प्रेरक (सेंसरी मोटर) अवस्था के नाम से जाना जाता है। इस अवधि में बच्चा संवेदनाओं और शारीरिक क्रियाओं के सहारे अपना संसार रचाता है। इस अवस्था में ही भाषा और विचार प्रक्रिया की नींव धीरे-धीरे पड़ने लगती है।
(2) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था या प्रारंभिक प्रक्रियात्मक अवस्था (दो से आठ वर्ष) - इस अवस्था में पहुंचकर बालक ने जिन कार्यों को संवेदना प्रेरक के आधार पर व्यवहारिक रूप में किया है उन्हें वैचारिक जामा पहनाने की कोशिश करता है। संवेदनात्मक अनुभव तथा प्रत्यक्ष ज्ञान उसकी सोच को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। इसी अवस्था से बालक सहज विचारों को ग्रहण करना प्रारम्भ करता है। इस अवस्था में यदि बालकों को वस्तुओं से छेड़छाड़ करने का अवसर दिया जाय तो विभिन्न रूपों में दिखने वाला किसी एक वस्तु को अथवा एक जैसी दिखने वाली विभिन्न वस्तुओं के बीच के अन्तर को पहिचान सकता है। इस अवस्था में बालक में अवधारणा बनाने या परिकल्पना करने की शक्ति बहुत सीमित होती है।
(3) ठोस क्रियात्मक अवस्था : (आठ वर्ष से 12 वर्ष) - इस अवस्था में बालक तर्क पूर्ण ढंग से वास्तविक जगत के बारे में सोचना प्रारम्भ कर देता है। इस अवस्था में बालक ठोस और मूर्त स्थितियों से बहुत गहरे स्तर पर जुड़ा रहता है परन्तु किसी एक परिस्थिति से दूसरी परिस्थिति के सामान्यीकरण में अभी भी उसको कठिनाई होती है। इस अवस्था को मूर्त संक्रियात्मक अवस्था के नाम से भी जाना जाता है.
(4) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था : (12 से 16 वर्ष) - इस अवस्था में बालक क्रमशः तर्कपूर्ण ढंग से सोचने के योग्य हो जाता है तथा वह किसी विशेष समस्या का समाधान अनुमान के सहारे खोज सकता है। इस अवस्था से पूर्व उसके अनुभव ठोस परिस्थितियों पर आधारित थे लेकिन अब वह स्थितियों और संख्या संक्रियाओं की परिकल्पना कर सकता है। इस अवस्था को अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था के नाम से भी जाना जाता है।
विभिन्न अवस्थाओं में बालक के सोचने व सीखने के ढंग किसी एक अवस्था से दूसरी अवस्था में अचानक या प्रारंभ में परिमार्जित नहीं होता है लेकिन विकास की गति प्रत्येक बालक की समान होती है। विभिन्न परिस्थितियों में भाग लेकर तथा व्यावहारिक अनुभव से बालक सबसे अच्छी तरह सीखते हैं।
आरंभिक अवस्थाओं (जैसे संवेदी एवं पूर्व संक्रियात्मक अवस्था) में बालक खेल के माध्यम से सहज होकर सीखता है। खेल के माध्यम से बालकों में सम्बन्धों को देखने, अन्तर समझने, वर्गीकरण करने, कार्य-कारण संबंधों को पहचानने, परिकल्पना करने तथा उसे स्वीकार अथवा अपनाने की योग्यता का विकास होता है।
मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (ठोस क्रियात्मक अवस्था) में पहुँचकर बालक वस्तुओं, पदार्थों के साथ छेड़छाड़ करके तथा अवलोकन एवं बातचीत के सहारे सीखता है। इस अवस्था में पहुँचकर बालक का विभिन्न क्षेत्रों पर आधिपत्य सुनिश्चित होता है। इस अवस्था में विभिन्न पक्षों की स्थापना से बालक में आत्मविश्वास का उपार्जन होता है और उसे लगता है कि वह कुछ भी कर सकता है। इससे बालकों में सीखने को बढ़ावा मिलता है। जैसे-जैसे मोक्ष (या मानसिक) विकास होता है, वह सरल बातों को जानने के बाद अधिक जटिल बातों को जानने को और प्रयासरत रहता है।
प्रायः यह देखा जाता है कि बहुत से बालकों में योग्यता होते हुए भी वे शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में पिछड़ जाते हैं। इसके कुछ कारण हैं जो निम्नलिखित हैं:
(1) उचित वातावरण का निर्माण न होना - स्वच्छन्द, स्वतंत्र व निर्भीकता के वातावरण का अभाव।
(2) बालक की भावनाओं व इच्छाओं की पूर्ति न होना।
(3) शिक्षक का व्यवहार एवं व्यक्तित्व।
(4) सहपाठियों की गलत संगति।
(5) परिस्थितियों की उत्पत्ति न होना - बालकों में परस्पर होड़ लगी होना तथा वैयक्तिक विकास हेतु प्रोत्साहन न मिलना। प्रत्येक बालक का असुरक्षित अनुभव करना एवं निःसंकोच अपनी बात रखने के माहौल (परिस्थिति) का अभाव।
(6) अन्वेषण प्रक्रिया की समझ पैदा न हो पाना - बालकों में अन्वेषण के विभिन्न माध्यमों का प्रयोग करने का प्रोत्साहन न मिल पाना जैसे प्रश्न पूछना, प्रयोग करना, दूसरों से बातचीत करना, अवलोकन करना, सम्बन्धित साहित्य पढ़ना आदि के अवसरों का अभाव।
(7) बालकों को अपनी जिज्ञासाओं, निष्कर्षों और बातचीत को उचित रूप में सजाकर प्रस्तुत करने हेतु प्रोत्साहन न मिल पाना।
उपरोक्त बातों की भरपाई शाला स्तर पर शिक्षक एवं प्रधानपाठक मिलकर न करें तो निश्चित ही बच्चे शाला प्रदर्शन में अपने-आप को आगे नहीं ले जा पायेंगे और उनके हाथ असफलता ही लगेगी। इसके अलावा बालक की आयु के अनुसार उसे सीखने के उचित अवसर उपलब्ध न करायें जाये तो बालक निश्चित ही पिछड़ जायेगा एवं उसकी प्रतिभा संकुचित होकर दम तोड़ देगी। इस हेतु शिक्षक एवं पालक मिलकर बालक की प्रतिभा को उजागर करने हेतु मिलकर प्रयास करें।
प्रश्न 1. बौद्धिक विकास के सन्दर्भ में जन्म से लेकर दो वर्ष की आयु तक को किस अवस्था के नाम से जाना जाता है?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
(C) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(D) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 2. संवेदी प्रेरक अवस्था की समयावधि कितनी होती है?
(A) जन्म से लेकर 2 वर्ष
(B) 2 वर्ष से 8 वर्ष
(C) 8 वर्ष से 12 वर्ष
(D) 12 वर्ष से 16 वर्ष
प्रश्न 3. किस अवस्था में भाषा और विचार प्रक्रिया की नींव धीरे-धीरे पड़ने लगती है?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
(C) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(D) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 4. प्रारंभिक प्रक्रियात्मक अवस्था अथवा पूर्व संक्रियात्मक अवस्था की आयु कितनी होती है?
(A) जन्म से 2 वर्ष
(B) 2 से 8 वर्ष
(C) 8 से 12 वर्ष
(D) 12 से 16 वर्ष
प्रश्न 5. किस अवस्था में बालक सहज विचारों को ग्रहण करना प्रारम्भ करता है?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
(C) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(D) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 6. किस अवस्था में बालक में अवधारणा बनाने या परिकल्पना करने की शक्ति बहुत सीमित होती है?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
(C) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(D) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 7. ठोस क्रियात्मक अवस्था की समयावधि क्या है?
(A) जन्म से 2 वर्ष
(B) 2 से 8 वर्ष
(C) 8 वर्ष से 12 वर्ष
(D) 12 से 16 वर्ष
प्रश्न 8. किस अवस्था में बालक तर्कपूर्ण ढंग से वास्तविक जगत के बारे में सोचना प्रारम्भ कर देता है?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
(C) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(D) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 9. ठोस क्रियात्मक अवस्था को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
(A) मूर्त संक्रियात्मक अवस्था
(B) अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था
(C) सेंसरी मोटर अवस्था
(D) प्रारंभिक प्रक्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 10. औपचारिक क्रियात्मक अवस्था की आयु सीमा क्या है?
(A) जन्म से 2 वर्ष
(B) 2 से 8 वर्ष
(C) 8 से 12 वर्ष
(D) 12 से 16 वर्ष
प्रश्न 11. किस अवस्था में बालक किसी विशेष समस्या का समाधान अनुमान के सहारे खोज सकता है?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
(C) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(D) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 12. औपचारिक क्रियात्मक अवस्था को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?
(A) मूर्त संक्रियात्मक अवस्था
(B) अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था
(C) संवेदी प्रेरक अवस्था
(D) प्रारंभिक प्रक्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 13. विभिन्न परिस्थितियों में भाग लेकर तथा व्यावहारिक अनुभव से बालक कैसे सीखते हैं?
(A) सबसे अच्छी तरह
(B) कठिनाई से
(C) देर से
(D) बिल्कुल नहीं
प्रश्न 14. आरंभिक अवस्थाओं में बालक किसके माध्यम से सहज होकर सीखता है?
(A) पढ़ाई से
(B) खेल के माध्यम से
(C) डांट से
(D) सोने से
प्रश्न 15. खेल के माध्यम से बालकों में निम्न में से किस योग्यता का विकास होता है?
(A) सम्बन्धों को देखना
(B) अन्तर समझना
(C) वर्गीकरण करना
(D) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 16. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में पहुँचकर बालक किसके सहारे सीखता है?
(A) वस्तुओं से छेड़छाड़ करके एवं अवलोकन तथा बातचीत
(B) केवल सोने से
(C) केवल दूरदर्शन देखने से
(D) इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 17. किस अवस्था में विभिन्न पक्षों की स्थापना से बालक में आत्मविश्वास का उपार्जन होता है?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
(C) मूर्त / ठोस क्रियात्मक अवस्था
(D) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 18. प्रायः यह देखा जाता है कि बहुत से बालकों में योग्यता होते हुए भी वे किसमें पिछड़ जाते हैं?
(A) शाला प्रदर्शन में
(B) सोने में
(C) खेलने में
(D) हंसने में
प्रश्न 19. शाला प्रदर्शन में पिछड़ने का एक प्रमुख कारण क्या है?
(A) उचित वातावरण का निर्माण न होना
(B) अत्यधिक खेलकूद
(C) बहुत अधिक सोना
(D) अधिक भोजन करना
प्रश्न 20. बालकों के शाला प्रदर्शन में असफलता का कारण क्या है?
(A) बालक की भावनाओं व इच्छाओं की पूर्ति न होना
(B) शिक्षक का व्यवहार एवं व्यक्तित्व
(C) सहपाठियों की गलत संगति
(D) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 21. बालकों में परस्पर होड़ लगी होना तथा वैयक्तिक विकास हेतु प्रोत्साहन न मिलना किस बात का कारण बनता है?
(A) शाला प्रदर्शन में असफलता
(B) अत्यधिक सफलता
(C) बौद्धिक विकास में तीव्रता
(D) श्रेष्ठ स्वास्थ्य
प्रश्न 22. अन्वेषण प्रक्रिया की समझ पैदा न हो पाने का लक्षण क्या है?
(A) प्रश्न न पूछना
(B) प्रयोग न करना
(C) अवलोकन न करना
(D) उपर्युक्त सभी
प्रश्न 23. बालकों को अपनी जिज्ञासाओं, निष्कर्षों और बातचीत को उचित रूप में सजाकर प्रस्तुत करने हेतु क्या आवश्यक है?
(A) प्रोत्साहन
(B) दण्ड
(C) उपेक्षा
(D) डांट-डपट
प्रश्न 24. शाला स्तर पर बच्चों को असफलता से बचाने के लिए किसकी संयुक्त भूमिका होती है?
(A) शिक्षक एवं प्रधानपाठक
(B) केवल चपरासी
(C) केवल दुकानदार
(D) इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 25. यदि बालक की आयु के अनुसार उसे सीखने के उचित अवसर उपलब्ध न करायें जाये तो क्या होगा?
(A) बालक पिछड़ जायेगा
(B) बालक प्रथम आ जाएगा
(C) बालक बहुत बुद्धिमान बन जाएगा
(D) कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
प्रश्न 26. बालक की प्रतिभा संकुचित होकर कब दम तोड़ देती है?
(A) जब सीखने के उचित अवसर उपलब्ध न करायें जाए
(B) जब उसे बहुत ज्यादा खिलाया जाए
(C) जब वह रोज सोए
(D) इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 27. बालक की प्रतिभा को उजागर करने हेतु किसे मिलकर प्रयास करना चाहिए?
(A) शिक्षक एवं पालक
(B) केवल दुकानदार
(C) केवल अनजान व्यक्ति
(D) केवल विपक्षी
प्रश्न 28. संवेदनाओं और शारीरिक क्रियाओं के सहारे बच्चा किस अवस्था में अपना संसार रचाता है?
(A) संवेदी प्रेरक अवस्था
(B) ठोस क्रियात्मक अवस्था
(C) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था
(D) अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 29. किस अवस्था से पूर्व बालक के अनुभव ठोस परिस्थितियों पर आधारित थे?
(A) औपचारिक क्रियात्मक अवस्था
(B) संवेदी प्रेरक अवस्था
(C) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
(D) प्रारम्भिक अवस्था
प्रश्न 30. बालकों में कार्य-कारण संबंधों को पहचानने की योग्यता का विकास मुख्य रूप से किस गतिविधि से होता है?
(A) खेल के माध्यम से
(B) चुप रहने से
(C) सोने से
(D) डरने से
प्रश्न 1. उत्तर (A)
प्रश्न 2. उत्तर (A)
प्रश्न 3. उत्तर (A)
प्रश्न 4. उत्तर (B)
प्रश्न 5. उत्तर (B)
प्रश्न 6. उत्तर (B)
प्रश्न 7. उत्तर (C)
प्रश्न 8. उत्तर (C)
प्रश्न 9. उत्तर (A)
प्रश्न 10. उत्तर (D)
प्रश्न 11. उत्तर (D)
प्रश्न 12. उत्तर (B)
प्रश्न 13. उत्तर (A)
प्रश्न 14. उत्तर (B)
प्रश्न 15. उत्तर (D)
प्रश्न 16. उत्तर (A)
प्रश्न 17. उत्तर (C)
प्रश्न 18. उत्तर (A)
प्रश्न 19. उत्तर (A)
प्रश्न 20. उत्तर (D)
प्रश्न 21. उत्तर (A)
प्रश्न 22. उत्तर (D)
प्रश्न 23. उत्तर (A)
प्रश्न 24. उत्तर (A)
प्रश्न 25. उत्तर (A)
प्रश्न 26. उत्तर (A)
प्रश्न 27. उत्तर (A)
प्रश्न 28. उत्तर (A)
प्रश्न 29. उत्तर (A)
प्रश्न 30. उत्तर (A)
आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
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