गुण्य, गुणक एवं गुणनफल -
गुण्य - जिस संख्या में गुणा किया जाता है।
गुणक - जिसका दी गई संख्या में गुणा किया जाता है।
गुणनफल - गुण्य एवं गुणक का जो उत्तर होता है वह गुणनफल कहलाता है।
7 (गुण्य)
× 8
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56 (गुणनफल)
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अर्थात्
गुण्य × गुणक = गुणनफल
⇒ किसी भी संख्या में शून्य का गुणा करने पर गुणनफल शून्य ही आता है।
⇒ किसी संख्या में 10 का गुणा किया जाता है, तो संख्या के दायीं ओर एक शून्य लगाकर गुणनफल प्राप्त होता है। इसी तरह 100 का, 1000 का, 10000 आदि का गुणा करते हैं तो संख्या में (गुणक में) दिये गये शून्य गुण्य में लगाकर गुणनफल प्राप्त करते हैं।
जैसे -
75 × 10 = 750
263 × 100 = 26300
512 × 1000 = 5,12,000
23 × 10,000 = 230,000
[1] प्रसारित संकेतन विधि - इस विधि में हम गुण्य को शून्यांत + एकांकिक संख्या में प्रसारित कर उसमें से प्रत्येक अंक में गुणक का गुणा करके जोड़ देते हैं। या दिये गए गुण्य को शून्यांत वाली संख्या ± एकांकिक संख्या में प्रसारित करके प्रत्येक संख्या को गुणक से गुणा कर बाद में जोड़कर या घटाकर गुणनफल प्राप्त कर सकते हैं।
उदाहरण 1 - 123 × 4
123 × 4 = (100 + 20 + 3) × 4
= (100 × 4) + (20 × 4) + (3 × 4)
= 400 + 80 + 12
= 492
उदाहरण 2 - 95 × 4
95 × 4 = (100 - 5) × 4
= (100 × 4) - (5 × 4)
= 400 - 20
= 380
[2] स्तंभ विधि - इस विधि में सबसे ऊपर गुण्य लिखते हैं एवं उसके नीचे गुणक बायें तरफ गुणा का चिन्ह लगाकर दोनों के नीचे रेखा खींचकर गुणनफल को नीचे लिख देते हैं।
उदाहरण - 146 × 8
146 (गुण्य)
× 8 (गुणक)
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1168 (गुणनफल)
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[3] ऊर्ध्व तिर्यक विधि - (दो अंकों की संख्या में दो अंकों की संख्या का गुणन)।
इस विधि का प्रयोग केवल दो अंकों की संख्या में दो अंकों की संख्या का गुणा करने में आसानी से किया जा सकता है। इस विधि से तीन अंकीय संख्याओं का गुणन भी कर सकते हैं। इस विधि में गुण्य व गुणक को स्तंभ रूप में लिखकर दोनों संख्याओं के इकाई अंकों का गुणा करके गुणनफल के स्थान पर लिखते हैं। इसके बाद दोनों संख्याओं के अंकों का तिर्यक गुणा कर उनका योग करके गुणनफल में इकाई के बाद लिखा जाता है तत्पश्चात् अंत में बायें अंकों का ऊर्ध्व गुणन करके गुणनफल में लिखा जाता है।
उदाहरण - 32 × 21
32
× 21
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672
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प्रथम चरण (इकाई अंकों का ऊर्ध्व गुणा):
2 × 1 = 2
द्वितीय चरण (तिरछा गुणा करके योग):
(2 × 2) + (3 × 1) = 4 + 3 = 7
तृतीय चरण (बायकें अंकों का ऊर्ध्व गुणा):
3 × 2 = 6
इस तरह प्रथम चरण के अंक को इकाई, द्वितीय चरण के अंक को दहाई एवं तृतीय चरण के अंक को सैकड़ा में लिखकर गुणनफल प्राप्त करते हैं।
⇒ किसी संख्या में यदि 1 का गुणा किया जाये तो गुणनफल सदैव वही संख्या रहता है।
पहली विधि - बार-बार जोड़कर गुणा करना
उदाहरण - 123 × 3
123
+ 123
+ 123
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369
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दूसरी विधि - दीर्घ विधि
उदाहरण - 123 × 3
123
× 3
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9
60
+ 300
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369 (गुणनफल)
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तीसरी विधि - लघु विधि
123
× 3
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369
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(1) गणित के अन्तर्गत प्राचीन काल में प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ भास्कराचार्य (1114 ई.) ने 'सिद्धांत शिरोमणि' नामक ग्रंथ की रचना की।
(2) 'सिद्धांत शिरोमणि' ग्रंथ के लीलावती, बीजगणित, गणिताध्याय एवं गोलाध्याय चार भाग हैं। लीलावती में अंकगणित है। इसमें जोड़ना, घटाना, गुणा, भाग, वर्ग, वर्गमूल आदि को हल करने की रोचक विधियां दी गई हैं।
(3) भास्कराचार्य के गणित में अमूल्य योगदान के कारण ही हमारे देश के उपग्रह का नाम भास्कर रखा गया।
(i) जब हम दो अंकीय संख्या 11 को स्वयं से गुणा करते हैं तो गुणनफल के बीच का अंक 2 होता है। जैसे कि 11 × 11 = 121 में 2 बीच में है।
(ii) जब हम तीन अंकीय संख्या 111 का 111 में ही गुणा करते हैं तब बीच का अंक 3 एवं दोनों साइड में 2-2 एवं दोनों छोर पर 1-1 होते हैं। जैसे कि 111 × 111 = 12321 में 3 बीच में है।
यदि इसी तरह हम चार, पाँच अंक वाली ऐसी संख्या जिसमें सभी अंक 1 ही रहें, तो बीच का अंक संख्या में अंकों की संख्या के बराबर होगा।
हमारे दैनिक जीवन में हम औसत जानकारी या सामान्य जानकारी प्राप्त करने के लिए गुणनफलों का आंकलन करते हैं। आंकलन करने के लिए यदि दो अंकों की संख्या का गुणनफल करना हो तो उन संख्याओं के 10 के निकटतम निकटतम लेकर मौखिक गुणन कर लेते हैं। या फिर तीन अंकों की संख्या का गुणन करना हो तो 100 के निकटतम निकटतम लेकर मौखिक गुणनफल ज्ञात कर लेते हैं।
उदाहरण - 11 × 18
दस के निकटतम निकटतम लेने पर:
10 × 20 (क्योंकि 11 का निकटतम निकटतम 10 एवं 18 का निकटतम निकटतम 20 है)
= 200
जबकि वास्तविक गुणनफल होगा 11 × 18 = 198 जो कि आंकलित गुणनफल से केवल 2 कम है।
स्मरणीय बिंदु - ध्यान रखें कि यदि हम करें -
(i) इकाई × इकाई = इकाई या इकाई एवं दहाई
(ii) इकाई × दहाई = दहाई या दहाई और सैकड़ा
(iii) दहाई × इकाई = दहाई और सैकड़ा
(iv) दहाई × दहाई = सैकड़ा या सैकड़ा और हजार होता है।
उदाहरण - 345 × 232
चरण 1 - इकाई अंकों का ऊर्ध्व गुणन: 5 × 2 = 10 (शून्य लिखकर 1 हासिल)
चरण 2 - (4 × 2) + (3 × 5) = 8 + 15 = 23 + 1 (हासिल) = 24 (4 लिखकर 2 हासिल)
चरण 3 - (3 × 2) + (2 × 5) + (4 × 3) = 6 + 10 + 12 = 28 + 2 (हासिल) = 30 (शून्य लिखकर 3 हासिल)
चरण 4 - (3 × 3) + (4 × 2) = 9 + 8 = 17 + 3 (हासिल) = 20 (शून्य लिखकर 2 हासिल)
चरण 5 - बायीं ओर के अंकों का ऊर्ध्व गुणन: 3 × 2 = 6 + 2 (हासिल) = 8
अतः अभीष्ट उत्तर 80040 होगा।
सूत्र: गुण्य का बीजांक × गुणक का बीजांक = गुणनफल का बीजांक
उदाहरण 1 -
34 × 5 = 170
34 का बीजांक = 3 + 4 = 7
5 का बीजांक = 5
गुण्य का बीजांक × गुणक का बीजांक = 7 × 5 = 35 (3 + 5 = 8)
प्राप्त गुणनफल 170 का बीजांक = 1 + 7 + 0 = 8
अतः उत्तर सही है।
उदाहरण 2 -
231 × 112 = 25872
231 का बीजांक = 2 + 3 + 1 = 6
112 का बीजांक = 1 + 1 + 2 = 4
गुण्य × गुणक बीजांक = 6 × 4 = 24 (2 + 4 = 6)
उत्तर 25872 का बीजांक = 2 + 5 + 8 + 7 + 2 = 24 (2 + 4 = 6)
अतः उत्तर सही है।
प्रश्न 1. बच्चों को पैटर्न (प्रतिरूप) का अध्यापन कराने के पीछे शिक्षक का उद्देश्य होना चाहिए?
(A) समझ विकास
(B) तर्कशक्ति विकास
(C) अभिवृत्ति विकास
(D) कौशल उपरोक्त में कोई नहीं
प्रश्न 2. संख्या 3,56,78,970 में सन्निकट हजारवां मान निकालने के लिए दिये अंकों में किसका हजारवां निकटतम निकटटन प्राप्त करोगे?
(A) 7 का
(B) 8 का
(C) 9 का
(D) किसी का नहीं
प्रश्न 3. निम्न संख्याओं में से किस संख्या में सैकड़ा के निकटतम निकटटन वाली संख्या दर्शित है?
(A) 3445
(B) 2045
(C) 3900
(D) 3910
प्रश्न 4. कक्षा 4 की गणित में शिक्षक के लिए शिक्षण संकेत दिया गया है - "विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गुणा की आवश्यकता से अवगत करवाएँ। स्वयं के द्वारा सरल भाषा में बनाये हुए मौखिक प्रश्न हल करवाएं। प्रश्न में क्या दिया गया है, क्या ज्ञात करना है, रहे। यदि संभव हो तो प्रश्नों का चित्रात्मक निरूपण करवाएं।" उपरोक्त संकेत पढ़ने के पश्चात् निम्न प्रश्नों का उत्तर दें -
किस करवा उद्देश्य है?
(A) छात्रों के अन्दर दक्षता का विकास
(B) दो संख्याओं के बीच गुणा अवधारणा स्पष्ट होगी
(C) दैनिक जीवन के कार्यों में संक्रियात्मक गतिविधि को अच्छी तरह कर सकेंगे
(D) बच्चे में गुण्य की समझ का विकास होगा
प्रश्न 5. शिक्षक स्वयं द्वारा बताये गये गुणन के प्रश्नों में संख्याओं का प्रयोग कर सकता है -
(A) दो अंकों वाली संख्या
(B) एक एवं दो अंक संख्या
(C) दो अंकों वाली शून्यांत संख्या
(D) उपरोक्त सभी संख्या
प्रश्न 6. संभव हो तो शिक्षक चित्रात्मक निरूपण करवाएं शिक्षक बच्चों को समझाने के लिए कर सकता है -
(A) संख्या का श्यामपट्ट पर चित्रण
(B) संख्याओं की संपूर्ण गुणन संक्रिया
(C) गुणन की गतिविधियाँ
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
प्रश्न 7. बच्चों को गुणा की अवधारणा समझाने के लिए शिक्षक निम्न में से सहायक सामग्री का उपयोग कर सकता है -
(A) गिनती चार्ट
(B) अबाकस
(C) पहाड़ा चार्ट
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
प्रश्न 8. एक शिक्षक गणित विषय में प्रायमरी के विद्यार्थियों को गुणा करना सिखा सकता है यदि उसके बच्चों को ज्ञान है -
(A) गिनती एवं संख्याओं का
(B) पहाड़े कण्ठस्थ हैं
(C) यदि जोड़ना आता है
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. 111 × 111 होगा -
(A) 1234321
(B) 13124321
(C) 1324231
(D) 12321
प्रश्न 10. गुणन संक्रिया में द्वितीय संख्या होती है -
(A) गुण्य
(B) गुणनफल
(C) गुणक
(D) कोई नहीं
प्रश्न 11. दो अंकीय संख्याओं का ऊर्ध्व तिर्यक गुणन करने हेतु क्रमानुसार चरण होंगे -
a) बाيीं ओर के अंकों का ऊर्ध्व गुणन
b) दायीं ओर के अंकों का ऊर्ध्व गुणन
c) दायीं एवं बायीं ओर से के अंकों का तिर्यक गुणन का योग
d) अभीष्ट गुणनफल
(A) a b c d
(B) b a c d
(C) b e a d
(D) b a c d
प्रश्न 12. तीन के अंकों को पहाड़ा सिखाया जा सकता है -
(A) पहाड़े चार्ट से
(B) पहाड़ा चार्ट लिखकर
(C) संख्या रेखा पर पहाड़ा दर्शाकर
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
प्रश्न 13. यदि 1 का किसी संख्या में गुणा किया जाये तो गुणनफल होगा -
(A) वही रहेगा
(B) शून्य होगा
(C) यह निर्भर प्रक्रियाएँ हैं
(D) उपरोक्त सभी गलत है
प्रश्न 14. कक्षा तीसरी अध्यापन कराने वाला शिक्षक यदि अपने बच्चों को गुणन अवधारणा से परिचित कराना चाहता है तो उसे सबसे पहले क्या सिखाना पड़ेगा?
(A) जोड़ की संक्रिया
(B) घटाना की संक्रिया
(C) उपरोक्त दोनों सही हैं
(D) उपरोक्त दोनों सही नहीं हैं
प्रश्न 15. यदि किसी दी गई संख्या में 1 का गुणा किया जाए तो गुणनफल होगा -
(A) 1 होगा
(B) वही संख्या होगा जिसमें गुणा किया गया है
(C) कथन (A) भी कभी-कभी सत्य हो जाता है
(D) उपरोक्त सभी कथन गलत हैं
प्रश्न 16. यदि किसी संख्या को 10 से गुणा करना हो तो शून्य लगाने होंगे -
(A) एक
(B) तीन
(C) चार
(D) उपरोक्त सभी गलत
प्रश्न 17. कक्षा तीन में शिक्षण संकेत दिया गया है - कि प्रश्न संख्या 1 के लिए अलग-अलग संख्याएं लेकर 1, 10, 100 का बच्चों से गुणा करवायें। उक्त क्रियाकलाप शिक्षक को करना चाहिए क्योंकि -
(A) उसके विद्यार्थियों को गुणा संक्रिया नहीं आती
(B) सवाल रचना शिक्षक का काम है
(C) कुछ शिक्षक लापरवाह होते हैं जिन्हें याद दिलाना आवश्यक है
(D) छात्रों में गुणन की मौखिक संक्रिया हो पाता है
प्रश्न 18. यदि गणित में गुणा संक्रिया का विकास न हो तो हमें करना पड़ता -
(A) जोड़ की लम्बी-श्रंखलात्मक जोड़ किया
(B) घटाने की लम्बी चौड़ी श्रृंखलात्मक घटाना क्रिया
(C) कुछ नहीं करना पड़ता क्योंकि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा
(D) उपरोक्त सभी कथन गलत हैं
प्रश्न 19. यदि किसी गुणा संक्रिया में दूसरी संख्या शून्यांत संख्या है तो गुणनफल प्राप्त करने के लिए संख्याओं को जोड़ना अपने बच्चों को बढ़ायेंगे कि -
(A) गुणक में जोड़े
(B) गुण्य में जोड़े
(C) दोनों में से किसी में भी जोड़ सकते हैं
(D) सवाल अपूर्ण है
प्रश्न 20. प्रसारित संकेतन विधि में गुणा संक्रिया करने के लिए को प्रसारित किया जाता है -
(A) गुण्य
(B) गुणक
(C) गुणनफल
(D) सभी गलत
प्रश्न 21. गुणन की स्तंभ विधि में पुनसमूहन रहित विधि का उदाहरण है -
132 × 3 = 396
(A) सही
(B) गलत
(C) दोनों सही
(D) उपरोक्त सभी गलत हैं
प्रश्न 22. प्राथमिक स्तर पर गुणन के शाब्दिक प्रश्न अधिक लाभकारी होंगे -
(A) बड़ी संख्याओं पर आधारित
(B) छोटी-छोटी संख्याओं पर आधारित
(C) दैनिक लेन देन की छोटी संख्याओं पर आधारित
(D) विज्ञान से संबंधित संख्याओं पर आधारित
प्रश्न 1. उत्तर (A)
प्रश्न 2. उत्तर (A)
प्रश्न 3. उत्तर (C)
प्रश्न 4. उत्तर (C)
प्रश्न 5. उत्तर (D)
प्रश्न 6. उत्तर (A)
प्रश्न 7. उत्तर (C)
प्रश्न 8. उत्तर (A)
प्रश्न 9. उत्तर (D)
प्रश्न 10. उत्तर (C)
प्रश्न 11. उत्तर (B)
प्रश्न 12. उत्तर (C)
प्रश्न 13. उत्तर (A)
प्रश्न 14. उत्तर (A)
प्रश्न 15. उत्तर (B)
प्रश्न 16. उत्तर (A)
प्रश्न 17. उत्तर (D)
प्रश्न 18. उत्तर (A)
प्रश्न 19. उत्तर (B)
प्रश्न 20. उत्तर (A)
प्रश्न 21. उत्तर (A)
प्रश्न 22. उत्तर (C)
आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
EduFavour.Com
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1. गणित शिक्षण से चिंतन एवं तर्कशक्ति का विकास करना
2. गणित अध्यापन के प्रमुख उद्देश्य, चिंतन शक्ति का विकास
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5. गणित की मानसिक, व्यवहारिक, साँस्कृतिक एवं व्यावसायिक उपयोगिता, गणित का सौन्दर्य तथा सत्य, गणित अध्यापन के उद्देश्य
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