× Home Blogs Category About Us Privacy Policy Disclaimer Our services Terms & Conditions Social Media Link Our Other Websites
Logo
s

भक्तिकाल | सगुण धारा की रामभक्ति और कृष्णभक्ति शाखा || निर्गुण धारा की ज्ञानाश्रयी और प्रेमाश्रयी शाखा

By: RF competition   Copy    Share
 (434)          5551

भक्तिकाल

भक्तिकाल हिन्दी साहित्य का स्वर्णिम काल माना जाता है। इसे दो धाराओं में वर्गीकृत किया जा सकता है–
1. सगुण धारा
2. निर्गुण धारा।

भक्तिकाल की विशेषताएँ

भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं–
1. साकार एवं निराकार ब्रह्म की उपासना।
2. रहस्यवादी कविता का प्रारंभ।
3. आध्यात्मिकता और सदाचार प्रेरणा।
4. लोक कल्याण के पथ पर काव्य का चरमोत्कर्ष।
5. समस्त काव्य शैलियों का प्रयोग।
6. प्रकृति सापेक्ष्य वर्णन।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. अर्थ के आधार पर वाक्यों के प्रकार
2. रीतिकाल की विशेषताएँ और धाराएँ | प्रमुख कवि एवं उनकी रचनाएँ

सगुण धारा

भक्तिकाल की इस काव्य धारा के कवियों ने ईश्वर के साकार रूप की लीलाओं का वर्णन किया है। इस काव्य धारा को दो शाखाओं में वर्गीकृत किया जा सकता है–
1. रामभक्ति शाखा
2. कृष्णभक्ति शाखा।

रामभक्ति शाखा

इस शाखा में कवियों ने भगवान श्री राम के जीवन चरित्र को आधार बनाकर लेखन किया था। कवियों ने अपनी रचनाओं के आधार पर समाज को आदर्श मूल्यों, स्वस्थ गुणों, सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों की शिक्षा देने का प्रयत्न किया था।

रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं–
1. तुलसीदास– रामचरित मानस
2. अग्रदास– अष्टयाम
3. नाभादास– भक्तमाल
4. केशवदास– रामचन्द्रिका।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. छायावाद– विशेषताएँ एवं प्रमुख कवि
2. रहस्यवाद (विशेषताएँ) तथा छायावाद व रहस्यवाद में अंतर
3. प्रगतिवाद– विशेषताएँ एवं प्रमुख कवि
4. प्रयोगवाद– विशेषताएँ एवं महत्वपूर्ण कवि
5. नई कविता– विशेषताएँ एवं प्रमुख कवि

कृष्णभक्ति शाखा

कृष्णभक्ति शाखा में भगवान श्री कृष्ण के चरित्र को आधार बनाकर काव्य रचनाएँ की गई थी। इस शाखा में अष्टछाप के कवि थे।

कृष्णभक्ति शाखा के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं–
1. सूरदास– सूरसागर
2. मीराबाई– मीराबाई की पदावली
3. रसखान– प्रेम वाटिका।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. पत्र-साहित्य क्या है? | प्रमुख पत्र-साहित्य एवं उनके लेखक
2. निबन्ध क्या है? | निबन्ध का इतिहास || प्रमुख निबन्धकार एवं उनकी रचनाएँ
3. आत्मकथा क्या होती है? | प्रमुख आत्मकथा लेखक एवं उनकी रचनाएँ
4. संस्मरण क्या है? | प्रमुख संस्मरण लेखक एवं उनकी रचनाएँ
5. कहानी क्या होती है? | प्रमुख कहानीकार एवं उनकी कहानियाँ || उपन्यास और कहानी में अन्तर

निर्गुण धारा

जिन कवियों ने ईश्वर को निराकार रूप में अपने काव्य में स्थान दिया, उन्हें निर्गुण धारा के कवि के रूप में जाना जाता है। इस काव्य धारा को दो शाखाओं में वर्गीकृत किया जा सकता है–
1. ज्ञानाश्रयी शाखा
2. प्रेमाश्रयी शाखा।

ज्ञानाश्रयी शाखा

ज्ञान को ही ईश्वर तक जाने का मार्ग मानकर जिन कवियों ने काव्य साधना की, वे ज्ञानाश्रयी शाखा के कवि हैं।

ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि एवं उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं–
1. कबीरदास– बीजक
2. रैदास– गुरु ग्रंथ साहब
3. गुरुनानक।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. छावते कुटीर कहूँ रम्य जमुना कै तीर– जगन्नाथ दास 'रत्नाकर'
2. भज मन चरण कँवल अविनासी– मीराबाई
3. हिंदी का इतिहास– भारतेन्दु युग (विशेषताएँ एवं प्रमुख कवि)
4. हिन्दी का इतिहास– द्विवेदी युग (विशेषताएँ एवं कवि)
5. मैथिलीशरण गुप्त– कवि परिचय

प्रेमाश्रयी शाखा

वे कवि जिन्होंने प्रेम के माध्यम से ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग खोलना चाहा, वे कवि प्रेमाश्रयी शाखा के अंतर्गत परिगणित होते हैं।

प्रेमाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं–
1. मलिक मुहम्मद जायसी– पद्मावत
2. शेख रहीम
3. नसीर।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
1. गोस्वामी तुलसीदास– जीवन परिचय एवं काव्यगत विशेषताएँ
2. नाटक क्या है? | नाटक का इतिहास एवं प्रमुख नाटककार
3. सूरदास का जीवन परिचय एवं काव्यगत विशेषताएँ
4. जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय एवं काव्यगत विशेषताएँ
5. एकांकी क्या है? | एकांकी का इतिहास एवं प्रमुख एकांकीकार

आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
EduFavour.Com

💬 टिप्पणियाँ (Comments) 0
अभी कोई कमेंट नहीं है!

पहला कमेंट आप करें और इस पोस्ट को बेहतर बनाएं। 🌟

📝 अपनी राय दें (Post Your Comment)

🧮 7 + 7 = ?
🔒 सुरक्षा कोड सत्यापित करें

📂 श्रेणियाँ