× Home Blogs Category About Us Privacy Policy Disclaimer Our services Terms & Conditions Social Media Link Our Other Websites
Logo
अभी डाउनलोड करने हेतु क्लिक करें।
हमारे ऐप्स
s

सखी री लाज बैरन भई– मीराबाई

By: RF Competition   Copy    Share
 (142)          2110

"मीरा के पद"

सखी री लाज बैरन भई।
श्री लाल गोपाल के संग, काहे नाहिं गई।
कठिन क्रूर अक्रूर आयो, साजि रथ कँह नई।
रथ चढ़ाय गोपाल लैगो, हाथ मीजत रही।
कठिन छाती स्याम बिछुरत, बिरह में तन गई।
दासी मीरा लाल गिरधर, बिखर क्यों न गई।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
मो देखत जसुमति तेरे ढोटा, अबहिं माटी खाई― सूरदास

संदर्भ

प्रस्तुत पद्यांश 'मीरा के पद' नामक शीर्षक से लिया गया है। इस पद की रचना कवयित्री 'मीराबाई' ने की है।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
बाल्हा मैं बैरागिण हूँगी हो– मीराबाई

प्रसंग

प्रस्तुत पद्यांश में मीराबाई ने श्री कृष्ण से दूर हो जाने के कारण अपनी विरह वेदना व्यक्त किया है। उन्होंने स्वयं के श्री कृष्ण के साथ मथुरा न जाने पर पश्चाताप व्यक्त किया है।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
आचार्य केशवदास– कवि परिचय

महत्वपूर्ण शब्द

सखी- सहेली, बैरन- शत्रु या दुश्मन, गोपाल- भगवान श्री कृष्ण, क्रूर- कठोर या दुष्ट, कँह- को, मीजत- मलती, छाती- सीना, बिछुरत- दूर होना, बिरह- वियोग, तई- तप गया, बिखर- समाप्त।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
मीराबाई– कवि परिचय

व्याख्या

मीराबाई अपनी सहेली से कहती हैं कि मेरे मन की लज्जा (शर्म) ही मेरी सबसे बड़ी शत्रु (दुश्मन) है। समाज की परंपराओं से भयभीत होकर एवं लोक-लाज के कारण मैं भगवान श्रीकृष्ण के साथ न जा सकी। मुझे इस विषय पर अत्यंत पश्चताप है कि मैं अपने प्रभु के साथ ही क्यों नहीं चली गई। कठोर हृदय वाला एवं दुष्ट प्रवृत्ति वाला अक्रूर अपने साथ नया रथ सजाकर आया। वह भगवान श्रीकृष्ण को लेने आया था। वह श्रीकृष्ण को रथ पर चढ़ाकर मथुरा ले गया। इस कारण मैं ठगी-सी रह गई और हाथ मलती रह गई। श्रीकृष्ण से बिछुड़ते समय मेरे हृदय में अत्यधिक वेदना थी। भगवान श्रीकृष्ण से वियोग के कारण मेरा शरीर तीव्र ताप से भर गया था। मीराबाई अपना दुःख व्यक्त करते हुए कहती हैं, कि जिस क्षण मेरे प्रभु भगवान श्रीकृष्ण को लेकर अक्रूर मथुरा गये, उसी समय मेरा यह शरीर बिखर क्यों न गया अर्थात् मैं समाप्त क्यों नहीं हो गई।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
बीती विभावरी जाग री― जयशंकर प्रसाद

काव्य-सौंदर्य

1. मीराबाई ने पश्चाताप के साथ अपनी विरह वेदना को व्यक्त किया है।
2. ब्रजभाषा का प्रयोग किया गया है।
3. यमक एवं अनुप्रास अलंकारों का प्रयोग किया गया है।
4. पद-मैत्री की शोभा दर्शनीय है।
5. शान्त रस का अनूठा अंकन किया गया है।
6. माधुर्य गुण का प्रयोग किया गया है।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
मैया, मोहिं दाऊ बहुत खिझायो― सूरदास

आशा है, उपरोक्त जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी।
धन्यवाद।
R F Temre
rfcompetition.com

आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
EduFavour.Com

अभी डाउनलोड करने हेतु क्लिक करें।
💬 टिप्पणियाँ (Comments) 0
अभी कोई कमेंट नहीं है!

पहला कमेंट आप करें और इस पोस्ट को बेहतर बनाएं। 🌟

📝 अपनी राय दें (Post Your Comment)

🧮 6 + 6 = ?
🔒 सुरक्षा कोड सत्यापित करें

📂 श्रेणियाँ